Imaandar Lakadhara Ki Kahani 2 | ईमानदार लकड़हारे की कहानी

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Imaandar Lakadhara Ki Kahani
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Imaandar Lakadhara Ki Kahani 2 | ईमानदार लकड़हारे की कहानी

Imaandar Lakadhara Ki Kahani: कहानी सारांश: एक ईमानदार लकड़हारा रहता है जो हर दिन लकड़ी काटकर अपना जीवन यापन करता है। लेकिन एक दिन उसकी कुल्हाड़ी नदी में गिर जाती है और वहां जलदेवी प्रकट होती है और उसे सोने, चांदी और लोहे की एक कुल्हाड़ी देती है। पर क्या? क्या आप जानते हैं कि लकड़हारा कौन सी कुल्हाड़ी लेता है?

ईमानदार लकड़हारा | The Honest Woodcutter Story In Hindi

किसी गाँव के अंदर एक ईमानदार लकड़हारा रहता था, उस लकड़हारे का नाम भानु था। वह लकड़हारा बहुत ही ईमानदार और दयालु था, वह हर रोज जंगल में जाता था और लकड़ी काटकर उनका गठड बांदकर घर लाता था और उसके बाद वो उन लकड़ियों को बाजार में बेच देता था।

The Honest Woodcutter Story In Hindi
The Honest Woodcutter Story In Hindi

एक दिन जब वह जंगल से लकड़ी काट कर वापस आ रहा था, तभी अचानक उसके हाथ से कुल्हाड़ी छूट कर नदी में गिर गई। लकड़हारे ने नदी में छलांग लगा दी और कुल्हाड़ी खोजने की कोशिश की, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी उसे अपनी कुल्हाड़ी नहीं मिली।

कुल्हाड़ी ना मिलने के दुःख में वो लकड़हारा उस पुल के पास बैठ कर रोने लगा था।  उसकी रोने की आवाज सुनकर तभी अचानक वहां जलदेवी प्रकट हो गईं और फिर जलदेवी ने उस लकड़हारे पूछा कि क्या बात है, तुम यहाँ पर बैठ कर क्यों रो रहे हो?

लकड़हारे ने उत्तर दिया – मैं इस पुल को पार कर रहा था तभी अचानक मेरा पैर पुल में फंस गया और मैं गिर गया और मेरी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई?

जल देवी ने कहा, तुम यहीं रहो, मैं तुम्हारी कुल्हाड़ी लाती हूं। और जल देवी नदी के पास गई और नदी से एक सोने की कुल्हाड़ी ले आई और लकड़हारे को देने लगी लेकिन लकड़हारे ने सोने की कुल्हाड़ी नहीं ली और कहा कि जलदेवी यह कुल्हाड़ी मेरी नहीं है, मुझे मेरी चाहिए।

Imaandar Lakadhara Ki Kahani
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तब जलदेवी वापस नदी में चली गई और नदी से चांदी की एक कुल्हाड़ी ले आई और लकड़हारे को देने लगी, फिर लकड़हारे ने मना कर दिया, यह चांदी की कुल्हाड़ी भी मेरी नहीं है।

और इतना सुनने के बाद जलदेवी फिर से नदी के गहरे पानी में वापस चली जाती है और नदी से वो एक लोहे की कुल्हाड़ी ले कर आई और उस लकड़हारे से पूछा की ये कुल्हाड़ी आपकी है तो उस ने जवाब देते हुए कहा की जलदेवी यही है मेरी कुल्हाड़ी। जलदेवी ने लकड़हारे की दयालुता और ईमानदारी को देखते हुए लोहे की कुल्हाड़ी के साथ चांदी और सोने की कुल्हाड़ी भी उस लकड़हारे के हाथ में थमा दी। 

ईमानदार लकड़हारे की कहानी
ईमानदार लकड़हारे की कहानी

और लकड़हारा तीनों कुल्हाड़ियों को लेकर घर आ गया और अपनी पत्नी को सारी बात बताई, इससे पति-पत्नी दोनों बहुत खुश हुए। और फिर से लकड़हारे पहले की तरह हर दिन जंगल में जाता और लकड़ी काटकर बाजार में बेच देता और जो पैसा आता था उससे अपना घर चलाता था।

Moral: हम इस कहानी से सीखते हैं कि हमें ईमानदार और दयालु व्यक्ति होना चाहिए।

दोस्तों अगर आपको हमारे ईमानदार लकड़हारे की यह कहानी अच्छी लगी हो तो कृपया इसे शेयर करें और अपने विचार कमेंट बॉक्स में बताएं। 

🙏🙏इस कहानी को पढ़ने के लिए आप सब का धन्यवाद🙏🙏


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